Bachpan

बचपन के सवेरो मेंं कितने निश्चिन्त होते थे, 
अंगड़ाईयो से उठकर हम सुनहरे सपने बोते थे, 
दोस्तों संग खेल कूद मे जीवन के सारे आनंद लेते थे, 
बिन मन मेंं लिए कोई ईर्षा सबसे दिल के रिश्ते जोड़ते थे, 
हर सुबह नई ऊर्जा से कुछ कर गुजर्ने को प्रेरित रहते थे, 
हाँ बचपन के सवेरो मेंं हम कितने निश्चिन्त होते थे।।

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