इज़हार नहीं कर सकता

 करने को है बात बहुत पर शायद,

शुरुवात नहीं कर सकता।

दिल में है मेरे जज़्बात बहुत पर शायद,

उनका इज़हार नहीं कर सकता।

गलियों में इन दिनों चर्चा है,

महबूब मुझ सा कहीं और हो नहीं सकता,

यूं जो तरसा हूं दीदार को तेरे,

कोई और तरस नहीं सकता।

हां, करने को है बात बहुत पर शायद, शुरुवात कर नहीं सकता,

दिल में है मेरे जज़्बात बहुत पर शायद,

इज़हार नहीं कर सकता।

Corona

इश्क़, मोहब्बत, दोस्ती , अय्याशी , सब हो गई दर किनार,

प्रकृति ने जब नाराजगी में लगाई कोरॉना की ऐसी मार।


पहले प्रेम से मिलना जुलना कहलाता था हमारा अच्छा संस्कार,

अब तो कुण्डी मार k बैठो घर में भैया,

वरना बाहर हो जाएगा तिरस्कार।


अब तो अपनों से ही मिलने में लगता है काफी डर ,

अब क्या करेंगे जनाब ,

महामारी ने अपना कहर बरपाया ही है इस कदर।


लेकिन हिम्मत नहीं हारेंगे हम,

संयम को शास्त्र बनाएंगे,

कोरोणा के सामने हम यूं ही थोड़ी ना हार जाएंगे।

जिस्म की जिस्म से उचित दूरी बनाएंगे,

पर दिल का रिश्ता मजबूत कर के हम अब नए दौर में आएंगे।


ना रुके थे कल ,

ना रुके हैं आज,

ना रुकेंगे आनेवाले कल,

Corona पर विजय पा कर विजयशंक हम बजाएंगे।

जब हम बड़े हो जाएंगे

 जब हम बड़े हो जाएंगे, 

अपनी ही कहानी में खो जाएंगे।

ना चाहते हुए भी, आपके पास रहते हुए भी ,

आपसे दूर हो जाएंगे।

हां, हम इस बात से डरते हैं, लेकिन, हम तब भी आपको इतना ही प्यार करेंगे जितना आज करते हैं।