मां

 किस हद तक दुख दर्द सहा है तूने मां,

हार गम में खुश हो कर अपना धर्म निभाया है,

ममता का आंचल देकर तूने हार गम दूर भगाया है,

खुद जागकर लोरी गा कर पूरी नींद सुलाया है,

तेरे निश्चल प्रेम को जगत में कोई भी भूल ना पाया है,

जीवन के हर पथ पर तूने सच का पाठ पढ़ाया है,

जन्नत के हर लम्हों का हार संभव दीदार कराया है,

उन्नति पथ दिखला कर तूने कठिन राह चलाया है,

उन्नति पथ दिखला कर तूने कठिन राह चलाया है।।