इज़हार नहीं कर सकता

 करने को है बात बहुत पर शायद,

शुरुवात नहीं कर सकता।

दिल में है मेरे जज़्बात बहुत पर शायद,

उनका इज़हार नहीं कर सकता।

गलियों में इन दिनों चर्चा है,

महबूब मुझ सा कहीं और हो नहीं सकता,

यूं जो तरसा हूं दीदार को तेरे,

कोई और तरस नहीं सकता।

हां, करने को है बात बहुत पर शायद, शुरुवात कर नहीं सकता,

दिल में है मेरे जज़्बात बहुत पर शायद,

इज़हार नहीं कर सकता।

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